New Essay On Holi In Hindi 2018 PDF For Students, Children’s & Kids

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Essay On Holi

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Essay On Holi In Hindi
Holi Festival 2018

होली एक रंगो का त्योहार हे लोग फागुन के महीने में (मार्च ) बड़े धूमधाम से होली मानते हे। जीवन में हमारे लिए ये एक ऐसा त्योहार जो एक दूसरे को निकट और स्नेह लाती हे।  आज के दिन लोग एक दूसरे को रंग लगाना, गले मिलना और एक दूसरे से मिलते हे।  इसी समय पर सभी ढोलक, गाना, घुन बजाके धार्मिक और फागुन के गाने गाते हे।  ये  दिन पर बने हुए खास फाफड़ा, जलेबी, लाडू, हलवा आदि चीज़ खाते हे। होली  दहन का कार्यक्रम एक दिन पहले किया जाता हे।

Short Essay On Holi Festival In Hindi 

For School Students, We bring the latest and short essay on holi festival in Hindi language 2018. This festival is about color and water with the Holika Dahan mythological story. For more information, you can read and download PDF file presentation or speech on holi. होली पर निबंध (Essay On Holi In Hindi) Download करने के लिए नीचे की Link पर click करे. Next line to start 150 words paragraph on holi.

 

हिन्दू धर्म के लोग द्वारा होली भी एक व्यापक तौर पर मानाने वाला त्यौहार हे।  होली के दिन को वसंत ऋतु की शुरुआत माना जाता हे यानि की ये फागुन महीने में आता हे।  भारत भर में हर साल होली मानाने का एक इतिहास और महत्व भी हे। बहोत साल पहले, हिरण्यकश्यप नाम का एक भाई की एक कपटी बहन होलिका थी वो अपने भाई के पुत्र प्रह्लाद को गोद में बिठाकर जलना चाहती थी।  

परन्तु, प्रह्लाद विष्णु भगवन के बहोत बड़े भक्त थे जिन्होंने होलिका के आग से बचाया और उसी जलती आग में होलिका को भस्म कर दी।  तभी से हिन्दू धर्म के लोग एक बुरी शक्ति का नाश करने और अच्छाई के विजय के रूप में होली मानते हे। दिन भर एक दूसरे को रंग – गुलाल लगाके पूरा दिन जश्न मानते हे।  

Holi Festival Essay For School Students in Hindi Lauguge

Holi also known as colorful festival. Here we talking about ” holi par nibandh ” means Essay on holi in hindi launguge. Below you can copy and write for holi preparation in school compitition. The next Paragraph on Holi in 200 words.

 

खुशिया भरी होली एक रंगो का त्यौहार हे जो भारत भर में लोग खुशियों से मानते हे।  ये पर्व फागुन महीने में और वसंत ऋतु में आता हे और दिवाली की तरह इसे मनाया जाता हे। होली का त्यौहार के दिन एक अजीबसा, सुन्दर  और रंगबेरंगी नजर आता हे।  

होली का ये त्यौहार फागुन के अंतिम दिवस होलिका दहन की शाम से शुरुआत होती हे और अगला दिन रंगो से रंग ने के लिए होता हे।  छोटे बच्चे इस पर्व का बहोत इंतज़ार करते हे तथा आगे से ही पिचकारी, अलग अलग रंग, गुब्बारे की तयारी में लग जाते हे।  शहर, गांव के चौराहे पर लकड़ी, गोबर, पतंग और घास का ढेर करके उसे जलाकर होली की प्रथा का आरम्भ करते हे।  

छोटे बच्चे से लेके बड़ो तक सभी लोक एकठा होकर लकड़ी, घास और गोबर के ढेर को जलाकर होलिका दहन की शुरुआत करते हे।  महिलाये होलिका के सबंधित गाने गाते हे।  इस समय पर सभी लोग खुश रहते हे और अगले दिन का इंतज़ार करते हे।  ये एक ऐसा दिन हे जो लोग आपसे में मतभेद को भूलकर रंगो की बारिश करते हे साथ में मिठाई, पकवान के साथ त्यौहार मनाया जाता हे। 

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Essay About Holi Information 2018 

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होली उत्सव संपूर्ण चन्द्रमा के दिन फागुन के महीना में मानते हे।  इसे प्यार, ख़ुशी, जित और सुख के रूप में मनाया जाता हे। लोग एक दूसरे के साथ प्यार और खशिया जाहिर करने के लिए आकर्षित रंगो से खेलते हे।  इस्को मनाने का एक खास कारन और आस्था भी हे।  

पराने समय में, एक राजा हिरण्यकश्यप थे, उसकी बहन का नाम होलिका और पुत्र का नाम प्रह्लाद था।  प्रह्लाद एक सख्त भक्त था भगवन विष्णु का और उसके पिता चाहते थे के वे उसके समिट सभी उसकी पूजा करे।  लेकिन भक्त प्रह्लाद ने ये मन नहीं और वो भगवन विष्णु की पूजा करता रहा।  इससे नाराज पिता ने प्रह्लाद को अग्नि में जलाने का आयोजन किया। राजा ने अपनी बहन होलिका को कहा की वो पुत्र प्रह्लाद को लेके आग में बैठे क्युकी होलिका को भगवन से वरदान था की वे कभी आग से जल नहीं सकती, होलिका  पुत्र प्रह्लाद को लेके आग में बैठ गई परन्तु, हुआ ये की होलिका पूरी जलकर राख हो गई और प्रह्लाद को कुछ असर नहीं हुआ। आज के दिन इसी कथा से होली की शरुआत की जाती हे।  

इस पवित्र पर्व के दिन सभी लोग आपने प्रिय लोगो को मिलकर, रंग लगाकर होली खेलते हे, एक दूसरे को खुशियों बाटने के लिए कही सारी क्रिया में भाग लेते हे।  इसी तरह रंग के संग खुशिया मानते हे।

300 Word Holi Essay For Class 5th Students 

भारत के सभी भाइयों और बहनों में सुख और खुशी लाने वाला त्यौहार हे होली। इस दिन को हिन्दू धर्म के द्वारा मनाया जाने वाला पुण्य का त्यौहार हे।  ये अक्सर पर मार्च और वसंत ऋतु के शुरुआत में आता हे।  सभी लोग इसका बेताब से राह देखते हे और इसको मानाने की तैयारियां में लग जाते हे।  

होली त्यौहार मानाने के पीछे के प्रह्लाद का महत्व ज्यादा हे क्युकी उसके पिताजीने उसके बेटे को अपनी पूजा पाठ करने को कहा लेकिन प्रह्लाद  मना कर देते हे।  इसके बाद पिताजीने पुत्र को मर देने की योजना बनायीं और इस योजना में पिताजीने बहन होलिका का साथ लिया की उसे अग्नि में जिन्दा जलाया जाये। और एक बात थी की होलिका को वरदान था की वो अग्नि में कभी जल नहीं सकती। बाद में वो जलती आग में प्रह्लाद को गोद में लेके आग में बैठी परन्तु प्रह्लाद भगवन विष्णु का भक्त था इसीलिए होलिका पूरी जलकर रख हो गई और प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ।  उसी दिन से आज तक होली मनाई जाती हे क्युकी बुराइयों का नाश हो।  

करीब होली के एक दिन पहले से लोग रंगो की होली मानाने के लिए लकड़ी, गोबर, एकठा करते हे और रात को जलाकर होलिका दहन की कथा को याद करते हे।  विधिवार लोग उसे पुण्यशाली कार्य मानते हे और समझते हे की सकारात्मक शक्तिओ का घर में प्रवेश होता हे।  

होली एक रंगो का त्यौहार हे।  छोटे बच्चे से लेके बड़ो तक सभी लोग रंग, गुब्बारे की तयारी शुरू कर देते हे।  बच्चे तो पिचकारियां भरके दूसरे पर फेकते हे।  प्यार का इज़हार करने के लिए लोग एक दूसरे के भर जाते हे गले लगते हे और गुलाल लगाके त्यौहार मनाते हे।  

400 Words Essay In Hindi On Holi 2018

होली त्यौहार एक हिन्दू धर्म का दिवाली के जैसे मनाया जाता हे।  इस दिन का महत्व धार्मिक, आस्था, पूजा, पाठ से भरा हुआ हे।  आज के दिन सभी लोग होलिका दहन करने के बाद रंगो से खेलना शुरू कर देते हे।  छोटे बच्चे से के सभी वडील आदरणीय लोग भी आज के दिन की शरुआत रंगो से करते हे।  होली त्यौहार का रहस्य एक कथा से जुड़ा हुआ हे।  लोग इसे होलिका दहन के नाम से जानते हे। इसके लिए सभी लोग एक चोरे पे एकठा होके लकडिया, गोबर, गुब्बारा और पतंग लाने की तैयारियां करते हे। होली एक राजा की कथा को लेके मनाई जाती हे।  

होली एक मनोरंजन का त्यौहार हे।  रंगो से रंग के बिच की दूरिया मिट जाती हे।  सभी लोग एक दूसरे को गले मिलते हे और होली की बधाई देते हे।  इस दिन का महत्वपूर्ण हिस्सा प्रह्लाद और उसके पिताजी और उसकी बुआ होलिका के बिच में हे।  बहोत सालो पहले एक हिरण्यकश्यप नामका राजा था।  उसके बेटे का नाम प्रह्लाद था।  वो बहोत ही घमंडी था क्युकी उसे वरदान मिला था की उसे कोई भी इंसान या  जानवर मार  नहीं सकता।  इस अखुट शक्ति के कारन वे घमंडी हो गया था और खुद को भगवन कहलाता था और अपने पुत्र प्रह्लाद सहित सभी को उसकी पूजा करने को कहा था।   

जगह जगह पे उसका खौफ था लेकिन उसके बेटे प्रह्लाद ने उसकी पुआ करने का इंकार कर दिया क्युकी वो भगवन विष्णु का भक्त था।  प्रह्लाद के इस वर्ताव को देख कर हिरण्यकश्यप बहोत क्रोध में भराये और उसके बेटे को मारने का तरीका सोचा।  क्युकी आग में जल नहीं  सकती होलिका को वरदान था।  होलिका प्रह्लाद को गोद में लेके बैठ गई और वो जलकर भस्म हो गयी लेकिन प्रह्लाद नहीं जले क्युकी वो भगवन विष्णु का भक्त था।  इसी दिन से हिन्दू धर्म में लोग होली त्यौहार के नाम से जानते हे।  यही से होली की शुरुआत हो गई थी।  सभी बुराई के सामने एक अच्छे की जित हो सकती हे।

आज के दिन सभी शाला, कालेज, बैंक और सभी संस्था में छुट्टी रहती हे क्युकी सभी लोग साथ मिलके साथ में होली मन सके।  

Holi Essay In Hindi For Class 7 

होली रंगो का एक महत्वपूर्ण त्यौहार हे जिसे लोग जोश और आनंद से मानते हे।  भारत के लोगो द्वारा बहोत ख़ुशी से मनाया जाता हे।  आज के दिन लोग मस्ती, नाचना, गाना सभी प्रकार की क्रिया करके उत्सव मानते हे।  बच्चे तो एक सप्ताह पहले और उसके बाद भी होली को खेलकर मानते हे।  उत्तर भारत में हिन्दू धर्म के लोग मार्च महीने में ये त्यौहार मानते हे।  

सालो से चली आती परंपरा के पीछे एक पौराणिक कथा और कहानिया हे।  होली मानाने का बहोत बड़ा सालो पुराण महत्व हे।  हिन्दू धर्म के लोग इसे तब से मानते आ रहे हे।  प्राचीन कल से इस दिनको बहोत खुशिया से मानते हे जबकि होलिका ने आपने भतीजे प्रह्लाद को आग में जलने के लिए उसको अपनी गोद में बिठाया पर वो  जल नहीं पाया  और होलिका दहन हो गई थी।  होली की कथा में यही एक सबसे बड़ा रहस्य हे।  जबकि हिरण्यकशयप नामके राजा के पुत्र का नाम प्रह्लाद था और वो सभी को उसकी पूजा करने को कहता था लेकिन पुत्र प्रह्लाद  माना नहीं और वो भगवन बिष्नु की पूजा, अर्चना करता रहा।  उसके बाद होलिका को वरदान मिला था की वो कभी  आग में जल नहीं सकती तो उसके पिताजी ने प्रह्लाद ओके आग में जलने को कहा गया परन्तु प्रह्लाद को कुछ हुआ नहीं और होलिका आग में भस्म हो गई।  

जबकि पिता की योजना असफल रही और बहन होलिका जलकर रख हो गई क्युकी प्रह्लाद भगवन का भक्त था वो बच गया और होलिका मरी गई।  उसी प्राचीन समय से हिन्दू भारतीय ये त्यौहार मना रहे हे। होली के एक दिन पहले होलिका दहन का कार्यक्रम रखते हे जिसमे लकड़ी, घास , गोबर से बने ढेर को जलके होली की शुरुआत करते हे।  होलिका के ढेर की चारो और घूमके सभी लोग आपने स्वस्थ्य और संपन्न की कामनाये करते हे साथ साथ बुराई को भस्म करते हे।    

होलिका दहन के अगले दिन लोग रंगो, गुब्बारे, पानी के साथ घर के बहार होली खेलने की शुरुआत करते हे।  लोग रंगबेरंगी कलर लेके एक साथ एकठा हो जाते हे और आपस में रंग लगाकर ख़ुशी से होली की शुभकामनाये देते हे।  कुछ लोग इसके साथ साथ नाचना, गाना, मस्ती करना, पसंद करते हे।  बच्चे तो पहले से ही पिचकारियां, गुब्बारे , गुलाल की खरीदी करना चालू कर देते हे।  लोग इस महँ महान पर्व पर एक दूसरे को मिलके खाना कहते हे और रंग लगाते हे।  

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